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Wednesday, 29 January 2014

आज का दोहा : सहज का :
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अब  मन   को  धो   डालिये,  धुल  जाए  सँसार.
बन जाये फिर यह जगत, बस खुशियों का सार.
-डा.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
कोटा-राजस्थान ( चेन्नई से)

Love: इंतज़ार

Love: इंतज़ार: इंतज़ार कि घड़ियाँ गिनते - गिनते , प्रीत कि ओढ़नी ओढे मन दुल्हन सा हो गया है , मिलन कि आस लिए बस दरवाज़े पर टक - टकी लगाये पहरा देते...

Tuesday, 28 January 2014



कुछ विचार :


दुनिया भर में फैले असंख्य मित्रों-जन-गण से व्यक्तिशः संपर्क नामुमकिन है और फेस बुक ने हमें इतना करीब ला दिया है कि हम आसानी से, जब भी नेट पर हों, संवाद कायम कर सकते हैं. लेखक हैं तो साहित्य के माध्यम से और यदि लेखक नहीं हैं तो अपने जीवनानुभव,  आपस में status पर लिख क, र ऐसा किया जाना और एक पल मेँ  अपने मित्रों तक न केवल पहुँच जाना, बल्कि समाज-देश-घर-परिवार -कला-धर्म- अध्यात्म आदि क्षेत्रों में भोगे हुए यथार्थ /अनुभव , आपस में बाँट कर,  स्वस्थ मनोरंजन सहित,  समाज के बेहतरीकरण में बहुमूल्य योगदान कर सकते हैं- सीख सकते हैं-सिखा सकते हैं -आदि आदि.
लेकिन ऐसा हम क्यूँ नहीं करते -किसने रोका है और क्या संकोच है-मैं समझ नहीं पाया। कुछ मित्र कभी कुछ पोस्ट नहीं करते और  न  ही  मित्रों की  पोस्ट्स को पढ़ कर उसे like या उस पर comment   करते। ऐसे मित्रों का फेसबुक की दुनिया में क्या काम है और उनके यहाँ होने की आखिर प्रासंगिकता क्या है. मैं चाहूंगा कि आप सभी सुधी मित्र इसी विषय पर अपने विचार साझा करें।
यकीनन मनोरंजन हमारी जिंदगी से अलग कतई नहीं है, लेकिन भोडा-अस्लील-नंगा-अशोभनीय -हमारी स्वस्थ सांस्कृतिक- सामाजिक परम्पराओं के विरुद्ध मनोरंजन -मनोरंजन नहीं है, बल्कि मैं कहूंगा-आत्मघाती और समाज में कोढ़/कैंसर फ़ैलाने जैसा है.
यहाँ आप की पसंद की हर चीज मौजूद है, लेकिन निर्लज्जता और बेहयाई से तो अगर इंसान परहेज नहीं करेगा तो क्या हम जानवरों से यह आशा करेंगे? मैं समझता हूँ- सही जवाब है- बिलकुल नहीं। जो बात अपनी पत्नी से साझा नहीं कर सकते ,जिन चित्रों  को हम अपनी पत्नी-बच्चों- दोस्तों को दिखने में लज्जा महसूस करते हैं, उन बातों और चित्रों को यहाँ ,अपना नाम और प्रोफाइल चित्र बदल कर , सरे आम परोसते हुए यदि हम  एक पल के लिए स्वयं को मनुष्य होने का एहसास कर लें और सभ्य-सुसंस्कृत-सुशिक्षित समाज/ परिवार से होने की अपनी जिम्मेदारी पर विचार कर लें, तो यही फेसबुक हमें निखारने का काम करने लगेगा और हमारा अच्छा मित्र सिद्ध हो सकता है-ऐसा मेरा मानना है -आप क्या सोचते हैं-कृपया मुझसे साझा करेंगे तो मेरे -आप- सभी के लिए यह सही दिशा में बढता हुआ एक प्रभावी क़दम हो सकता है. 

सद्भावी,
डा.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
09214313946

Monday, 27 January 2014

शुभ संध्या दोस्तों (चेन्नई ) से :
अचंभे -अनुभव:
जब हम अपने गृह शहर कसबे या   गावं में होते हैं , तो फेसबुक मित्रों से बड़ी गर्मजोशी- आदर -सदभावना -प्यार से सने - मखमली आवरण  में पैक निमंत्रण,  उनके शहर आने के   लिए मिलते हैं  और बार-बार कुछ मित्र बाकायदा हर दो-चार दिनों में याद दिलाते  रहते हैं और सवाल करते हैं कि , "आप हमारे शहर कब आएंगे-हम  आप के आगमन का  इंतज़ार कर रहे हैं-आप  का हमाँरे घर में आतिथ्य स्वीकरोक्ति का." लेकिन जब उस शहर में पहुंच जाते हैं  तो वही मित्र (चंद अपवादों सहित ) याद् नहीं करते और मोबाइल   के जरिये सम्पर्क किये जाने  पर या तो जवाब नहीं देते  या फिर मिलने के प्रश्न पर निरुत्तर रह जाते हैं.
मैं चेन्नई में २१ जनवरी से हूँ और अभी ४ फरवी तक यहाँ हूँ -यह विदित होने पर भी  चंद  दोस्तों ने सिर्फ हांल -चाल जान लिया और मिलने की  पहल कहीं से भी नहीं।
खैर छोड़िये- मैं खुश हूँ अपनी बेटी के साथ और परम श्रध्देय गुरुदेव के साथ- श्री राम चन्द्र मिशन के चेन्नई स्थित ,,अंतर राष्ट्रीय मुख्यालय 'बाबूजी मेमोरिल आश्रम 'में और किसी से भी मुझे कोई गिला  नहीं है। लखनऊ- बस्ती-गोरखपुर -शाहजहांपुर में मित्रों ने बहुत प्यार -सम्मान दिया और मित्रता के सही मायने भी  उनहोंने  पुष्ट किये। मेरे स्वागत में अनेक संस्थओं ने वहाँ  संगोष्ठियां आदि  भी  आयोजित कीं।  सभी जगहों में मित्रों ने अपने घरों में पारिवारिक वातावरण दिया और  घर से कहीं ज्यादा अच्छे घर का एहसास करवाया।  मैं उनका सदैव आभारी रहूंगा।  चेन्नई के भी दोस्तों का , जिन्होंने मो-वार्ता से कुशल-क्षेम जाना , आभारी हूँ व रहूंगा।
 यह शिकायत करने के लिए नहीं, बल्कि अपने  भोगे हुए अनुभव/ यथार्थ , इस आभासी फेसबुक दुनियां के -आप के साथ साझा  करने के लिए है, ताकि आप जब कहीं  जाएँ तो किसी से कोई  अपेक्षा  न करें और यदि कोइ मो-वार्ता भी करता हो  तो उसे धन्यवद दें और खुश रहें।  ये घटनाएं हमें सिखाती हैं ,अतः इनका स्वागत करें।
सद्भावी/दोस्त/स्नेहाकांक्षी /सादर/सस्नेह आप का,
डा.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
चेन्नई (तमिलनाडु)