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Thursday, 8 August 2019

आगमन हर्षोल्लास का -वर्षा

आगमन-हर्षोल्लास का:
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कल रात
बड़ी मेहरबानी की
बारिश ने
रात भर गिरी
हर दिल में
आस भरी
अनवरत
अभी भी
जारी है
अब गर्मी पर
भारी है
चैन मिला
अंतस में
आनन्द का
चला सिलसिला
मिटा गिला
बेचैनी का
हिम पिघला
अनचाही -अनपेक्षित
तप्त धरा को चैन मिला
उष्मा का गुरूर हिला
छोटे बच्चे
बूढ़े-जवान
मर्द-औरत
निहार रहे हैं
आल्हाद से
लाड़-प्यार से
अबाध -बेझिझक
पड़ती बारिश को
कुछ छतरी लेकर
कुछ बेख़ौफ
खुले में सड़क पर
निकल आए हैं
कुछ गर्व से
टहल रहे हैं
आँगन में ही
उद्दंडों की टोली
लड़के - लड़कियों की
पैदल-बाइक-साइकिलों पर
छोटी नदी का
रूप ले चुकी सड़क पर
अलमस्त
गीत गुनगुना रहे हैं
कुछ भुनभुना रहे हैं
कुछ
मन की सुना रहे हैं
लिख डाला मैने भी
अभी -अभी
उकेर दिया
ह्रिदय पटल पर
बारिश के आगमन के
इस अचानक हाथ लगे
हर्षोल्लास को
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@
डा०रघुनाथ मिश्र 'सहज'


गीतिका


मात्राभार 32
पदांत विहीन
समान्त- आना
मेरी प्रिय गौरैया आओ मेरे आँगन में रोजाना.
परिजन इंतजार करते हैं छेड़ो कोई मधुर तराना.

परिजन सारे भूखे रहते जब तक तुम नहिं दर्शन देती,
मन आनंदित हो उठता है जब तुम लेती पानी- दाना.

आँगन सूना-सूना लगता तुम बिन सारे घर वालों को,
हमको नहीं कभी भाता है तुम बिन कुछ भी पीना-खाना.

तुम सदस्य बन गयी हो घर की ऐसा हमको लगता है',
रोज तुम्हें हम याद करेंगे आना कहीं भूल न जाना.

'सहज' तुम्हारे गीत सुहाते महकाते घर-आँगन को वे,
हम सबकी आदत में है अब साथ तुम्हारा हर पल पाना'.

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@डॉ.रघुनाथ श्र 'सहज'
सर्वाधिकार सुरक्षित

अंतरध्वनि (मुक्तक)
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जी चाहे, जो कुछ कह लेना.
सीखा है, सब कुछ सह लेना.
'सहज' दिली ख्वाहिश है मेरी,
जैसा हूँ ,वैसा गह लेना.
@डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता/साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित

आगमन हर्षोल्लास का : बारिस


कल रात
बड़ी मेहरबानी की बारिश ने
रात भर गिरी अनवरत
हर दिल में आस भरी
अभी भी जारी है
अब गर्मी पर भारी है
चैन मिला अंतस में
आनन्द का चला सिलसिला
मिटा गिला बेचैनी का
 हिम पिघला अनचाही -अनपेक्षित
तप्त धरा को चैन मिला
उष्मा का गुरूर हिला
छोटे बच्चे बूढ़े-जवान मर्द-औरत
निहार रहे हैं आल्हाद से
लाड़-प्यार से
अबाध -बेझिझक पड़ती बारिश को
कुछ छतरी लेकर
कुछ बेख़ौफ खुले में
सड़क पर निकल आए हैं
कुछ गर्व से टहल रहे हैं
आँगन में ही
उद्दंडों की टोली
लड़के - लड़कियों की पैदल-बाइक-साइकिलों पर
छोटी नदी का रूप ले चुकी सड़क पर
अलमस्त गीत गुनगुना रहे हैं
कुछ भुनभुना रहे हैं
कुछ मन की सुना रहे हैं
लिख डाला मैने भी अभी -अभी
उकेर दिया ह्रिदय पटल पर
बारिश के आगमन के
 इस अचानक हाथ लगे हर्षोल्लास को
@डा०रघुनाथ मिश्र 'सहज'
आगमन-हर्षोल्लास का: 000 कल रात बड़ी मेहरबानी की बारिश ने रात भर गिरी हर दिल में आस भरी अनवरत अभी भी जारी है अब गर्मी पर भारी है चैन मिला अंतस में आनन्द का चला सिलसिला मिटा गिला बेचैनी का हिम पिघला अनचाही -अनपेक्षित तप्त धरा को चैन मिला उष्मा का गुरूर हिला छोटे बच्चे बूढ़े-जवान मर्द-औरत निहार रहे हैं आल्हाद से लाड़-प्यार से अबाध -बेझिझक पड़ती बारिश को कुछ छतरी लेकर कुछ बेख़ौफ खुले में सड़क पर निकल आए हैं कुछ गर्व से टहल रहे हैं आँगन में ही उद्दंडों की टोली लड़के - लड़कियों की पैदल-बाइक-साइकिलों पर छोटी नदी का रूप ले चुकी सड़क पर अलमस्त गीत गुनगुना रहे हैं कुछ भुनभुना रहे हैं कुछ मन की सुना रहे हैं लिख डाला मैने भी अभी -अभी उकेर दिया ह्रिदय पटल पर बारिश के आगमन के इस अचानक हाथ लगे हर्षोल्लास को 000 @डा०रघुनाथ मिश्र 'सहज'

Thursday, 9 February 2017

'सहज' के दोहे

रचनाकार- डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
विधा- दोहे
जीवन है अनमोल यह, इसको नहीं बिगाड़.
यह है दुर्लभ से मिला,समझ नहीं खिलवाड़.
सोच सार्थक हो सदा,दिन कैसे भी होयँ.
निश्चित काटेंगे वही, जो खेतों में बोयँ.
सदा सफलता के नियम,रहें अटल ले मान.
इसी लिए तू कर जतन,छोड़ सभी अभिमान.
आवश्यकता ठीक है, इक्षा का क्या अंत.
सब उस पर ही छोड़ दे, उसकी शक्ति अनंत.
'सहज'सीख ले पाठ तू,रहे मगन हर हाल.
समय बड़ा बलवान है, मत बांधे पुल-पाल.
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@डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता/साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित.